रिपोर्टर @ दिपक सेवदा बाड़मेर/धोरीमन्ना। संतों की संगत से ही जीवन सार्थक हो जाता है और कुसंगत से जीवन नरक के समान हो जाता है। यह विचार रा...
रिपोर्टर @ दिपक सेवदा
बाड़मेर/धोरीमन्ना। संतों की संगत से ही जीवन सार्थक हो जाता है और कुसंगत से जीवन नरक के समान हो जाता है। यह विचार रामस्नेही संप्रदाय रामधाम खेड़ापा के उत्तराधिकारी आचार्य संत गोविंदराम शास्त्री ने व्यक्त किए। आचार्य शास्त्री मंगलवार को क्षेत्र के छोटू गांव के खिंयाणी नाइयों की ढाणी में सत्संगी प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने कहा ज्ञानी लोग हमेशा अपने ज्ञान का प्रचार - प्रसार करते रहते है। इसलिए हमें उनकी संगत में रहकर अपने मन के अंदर छुपे सारे दुर्गुणों को दूर कर लेना चाहिए।अच्छी संगत से ही मनुष्य श्रेष्ठ बनता हैं। उन्होंने अपने प्रवचन में श्रद्धालुओं से कहा की गो माता के लिए जितना आप कर सकें, उतना कम है, संसार में गो माता की की मान्यता सबसे बड़ी है।
शास्त्री ने कहा कि भगवान का भजन ही भागवत कथा का सार है।रामस्नेही संप्रदाय के रामधाम खेड़ापा के आचार्य गोविंदराम के उत्तराधिकारी बनने के बाद पहली बार छोटू आगमन पर महिलाओं ने कलश यात्रा के साथ उनका स्वागत किया। पश्चात सत्संग का आयोजन हुआ एवं कई साधु संतों ने प्रवचन दिया। इस अवसर पर बलरामदास महाराज , काशीरामजी , कुशालदास , मोहनदास , ईश्वरदास , नेनूदास , केशवदास सहित रामस्नेही संप्रदाय के साधु संत व बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।
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