Page Nav

SHOW

Breaking News:

latest

बच्चे की प्रथम गुरु होती है माँ-प्रेमबाईसा

रिपोर्टर : ओमप्रकाश मूंढ बाड़मेर/बायतु। क्षेत्र के  परेऊ गाँव के पिराणी साईयों की ढाणी स्थित  रूपनाथ महाराज की समाधि स्थल पर महंत श्रीमोटनाथ...

रिपोर्टर : ओमप्रकाश मूंढ
बाड़मेर/बायतु। क्षेत्र के  परेऊ गाँव के पिराणी साईयों की ढाणी स्थित  रूपनाथ महाराज की समाधि स्थल पर महंत श्रीमोटनाथ महाराज लीलसर धाम व महंत श्रीओंकार भारती महाराज के पावन सानिध्य में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन बालसाध्वी प्रेमबाईसा की ओर से कथा वाचन किया गया। इस दौरान वामन अवतार, राम अवतार व श्रीकृष्ण अवतार की मनमोहक झाकियों को देख श्रद्धालु भाव विभोर होकर झूमने को मजबूर हो गए।

इस अवसर पर कथा वाचक बालसाध्वी प्रेमबाईसा ने कहा कि बालक की पहली गुरु माँ होती है।बालक पर सबसे अधिक संस्कारों का प्रभाव भी माँ का ही होता है। माँ चाहे तो बालक को देशभक्त , समाजसेवी और चोर-डाकू भी बना सकती है। बालसाध्वी ने कहा कि बालकों के साथ लाड़-प्यार के साथ-साथ उनकी आदतों पर भी कड़ी निगाहें रखें।यदि बालक कहीं पर भी गलती करता है,तो बिना देरी किये उसे टोके। यदि जरूरत पड़े तो थप्पड़ भी मारे।बालसाध्वी ने वर्तमान युग में बालको में संस्कारवान उच्च शिक्षा की आवश्यकता पर बल देते हुए बताया कि संस्कारवान बालक ही आगे बढ़कर परिवार,समाज व देश की सेवा करने के काबिल बन सकता है।बालसाध्वी ने संस्कारवान संतान को सबसे बड़ी पूंजी बताते हुए कहा कि करोड़पति व्यक्ति का पुत्र यदि उसके पिता का कहना नही मानता है, तो उसके पास करोड़ों की संपत्ति का कोई अर्थ नहीं होता है।उन्होंने कहा कि संस्कारवान संतान ले समान पिता के लिए संसार में कोई बड़ा सुख नहीं हो सकता।बालसाध्वी कहा कि कलयुग में इंसान पैसों के लिए चौबीस घंटे मेहनत करता है।लेकिन धन से सुख की बजाय परिवार में शांति व प्रेम के बिना सुख असंभव है।उन्होंने बालकों को भारतीय संस्कृति व धर्म के मार्ग पर चलकर जीवन को सफल बनाने की बात कही।प्रेमबाईसा ने कहा कि इंसान का नाम भगवान के नाम पर रखने की नसीहत देते हुए बताया कि इंसान के नाम के बहाने भगवान् को याद किया जा सकता है।उन्होंने बताया कि अहंकार से हमेशा पतन होता है।उन्होंने जीवन में अहंकार नही करने की नसीहत दी।बालसाध्वी ने बताया कि वृक्ष पर फल लगते है, तो वह वृक्ष झुकने लगता है।ठीक उसी प्रकार ज्ञानी मनुष्य भी घमण्ड व मोह माया से हटकर प्रेम व नम्रता को अपनाकर झुकने लगता है।

बालसाध्वी ने बताया कि गलती के बाद पश्चाताप करने से पापों से मुक्ति मिलती है।उन्होंने अनजान में गलती करने के बाद प्रायश्चित कर भविष्य में किसी प्रकार का पाप नहीं करने का संकल्प लेने की बात कही।इस दौरान वामन अवतार, राम अवतार व श्रीकृष्ण अवतार की झांकियों के माध्यम से उनका मन मोहक वर्णन भी किया गया।इस अवसर पर आस-पास के गाँवों के बड़ी संख्या में श्रोता मौजूद थे।

कोई टिप्पणी नहीं