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20 नवंबर 2016

सारी बिमारियों की जड़ कब्ज का परमानेंट आयुर्वेदिक इलाज

राजेश सैन शामली
दुनिया में विचित्र विचित्र लोग भी देखने को मिलते हैं की ऊपर से तो बहुत अप टू डेट, फ्रेश, चमकते, दमकते दीखते हैं पर जरा उनसे अन्दर का हाल चाल पूछो तो पता चलता है की कई दिनों से कब्ज से परेशान है और जिसके वजह से उन्हें गैस एसीडीटी आदि सैकड़ों तकलीफे परेशान कर रही हैं।
पाउडर, क्रीम, लिपिस्टिक आदि से चेहरे की नकली चमक दमक तो पैदा की जा सकती है पर अन्दर की ताजगी नहीं। शरीर के अन्दर की ताजगी और उत्साह को महसूस कर पाना एक कब्ज के मरीज के लिए असम्भव है।

आयुर्वेद कहता है की लगभग सारी बिमारियों का सबसे पहला कारण या जड़ कब्ज ही होती है इसलिए कभी भी कब्ज को हल्के में नहीं लेना चाहिए !
एक पुरानी कहावत भी है की जिस का पेट साफ़ हो और जिस पर कोई कर्ज ना हो तो उससे बड़ा सुखी कौन है !
कब्ज होने का अर्थ है, पेट ठीक तरह से साफ नहीं हुआ है या शरीर में तरल पदार्थ की कमी है।
अगर आपको लंबे समय से कब्ज रहता है और आपने इस बीमारी का इलाज नहीं कराया है तो ये एक भयंकर बीमारी का रूप ले सकती है।
कब्ज होने पर व्यक्ति को पेट संबंधी दिक्कते भी होती हैं, जैसे पेट दर्द होना, ठीक से फ्रेश होने में दिक्कत होना, शरीर का मल पूरी तरह से न निकलना इत्यादि । आइए जानते हैं कब्ज के लिए आयुर्वेदिक उपचार –
– रोज लैट्रिन (शौच) जाने का समय बिल्कुल निश्चित होना चाहिए ! क्योंकि अगर समय निश्चित हो तो बिना किसी दवा के भी पेट साफ़ होने लगता है ! रोज निश्चित समय पर जाकर लैट्रिन में बैठने से कुछ दिन बाद अपने आप बिना किसी मेहनत के आराम से पेट साफ़ होने लगता है। अगर लैट्रिन जाने का रोज का समय बार बार बदलेगा तो निश्चित कब्ज होनी ही है (नोट – लैट्रिन या पेशाब करते समय जोर लगाना बहुत हानिकारक होता है इसलिए अपने से जितना मल या पेशाब आसानी से बाहर निकल जाय उतना ही ठीक है, और ज्यादा मल या पेशाब जबरदस्ती बाहर निकालने के लिए कभी भी जोर नहीं देना चाहिए)।
– अगर किसी को कब्ज हो तो उसे अधिक मात्रा में पानी पीने की सलाह दी जाती है तथा गर्म पानी पीने से ज्यादा फ़ायदा होता हैं। पानी की कमी से आंतों में मल सूख जाता है और मल निष्कासन में जोर लगाना पडता है। इसलिये कब्ज से परेशान रोगियों के लिये सर्वोत्तम सलाह तो यह है कि मौसम के मुताबिक 24 घंटे में 3 से 5 लिटर पानी पीने की आदत डालना चाहिये। और अगर एक नार्मल आदमी भी इतना पानी रोज पिए तो उसे कभी कब्ज होगी ही नहीं ! सुबह उठते ही 1 लिटर पानी पीयें। फ़िर 2 से 5 किलोमीटर तेज चाल से मॉर्निंग वाक (पैदल चले) करें। शुरू में कुछ अनिच्छा और असुविधा महसूस होगी लेकिन धीरे-धीरे आदत पड़ जाने पर कब्ज जड़ से ही मिट जाएगी (ध्यान रखें सिर्फ पानी की सही मात्रा पीने भर से ही, बिना किसी दवा के, कब्ज की बीमारी निश्चित ठीक हो जाती है)।
– मेथी के दानों को हल्की आंच पर भून (सेंक) कर रात को 1-2 चम्मच खाने से सुबह पेट बढ़िया साफ़ होता है। मेथी के दानों को बिना भूजे हुए खाने से इसका उल्टा फायदा मिलता है मतलब अगर दस्त हो रही हो तो कच्ची मेथी खाने से दस्त बंद हो जाती है। मेथी कच्ची खाएं या भूजी, ये पेट के अलावा डायबिटिज तथा ह्रदय रोगों में भी बहुत फायदा है।
– कब्ज के पुराने रोगी को तरल पदार्थ, सादा और आसानी से पचने वाला खाना (जैसे दलिया, खिचड़ी) इत्यादि ही अधिक खाना चाहिए।
– कब्ज के दौरान कई बार सीने में भी जलन होने लगती हैं। ऐसे में एसीडिटी होने और कब्ज होने पर शक्कर और देशी गाय माता के घी को मिलाकर खाली पेट खाना चाहिए।
– हरी सब्जियों और फलों जैसे पपीता, अंगूर, गन्ना, अमरूद, टमाटर, चुकंदर, अंजीर फल, पालक का रस या कच्चा पालक, किशमिश को पानी में भिगोकर खाने, रात को मुनक्का खाने से कब्ज दूर करने में मदद मिलती है।
– इसबगोल की की भूसी कब्ज में परम हितकारी है। पानी के साथ 2-3 चम्मच इसबगोल की भूसी रात को सोते वक्त लेना फ़ायदेमंद है और इससे सुबह पेट आराम से साफ़ होता है (इसबगोल एक कुदरती रेशा है और आंतों की सक्रियता बढाता है)।
– श्री बाबा रामदेव के पतंजलि आयुर्वेद के भी कई प्रोडक्ट हैं (जैसे – दिव्य चूर्ण, उदर कल्प चूर्ण, त्रिफला चूर्ण, हरीतकी चूर्ण आदि) जो कब्ज में बहुत फायदेमंद हैं। ये प्रोडक्ट सुरक्षित हैं और लम्बे समय तक इनका इस्तेमाल किया जा सकता है फिर रोज इनकी मात्रा धीरे धीरे कम करने से बिना इन प्रोडक्ट को खाए भी, पेट साफ़ होने लगता है।
– खाने में हरे पत्तेदार सब्जियों के अलावा रेशेदार सब्जियों का सेवन खासतौर पर करना चाहिए।
– गर्म पानी और गर्म दूध कब्ज दूर करते हैं। रात को गर्म दूध में भारतीय देशी गाय माता का घी डालकर पीना कब्ज को दूर करने में कारगार है।
– रात सोते समय, दूध में 2-3 छुवारे उबाल कर, छुवारे खाकर दूध पीने से।

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