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परो के शराब माफिया ने तीन दिन पहले ठेको पर की थी सप्लाई

बाड़मेर शराब दुखान्तिका में अब तक दर्जन भर मौते सामने आई तो कई पीड़ित हस्पतालों में उपचार के लिए भर्ती हैं सरहदी इलाको के साथ यह आंच बाड़मेर के...

बाड़मेर शराब दुखान्तिका में अब तक दर्जन भर मौते सामने आई तो कई पीड़ित हस्पतालों में उपचार के लिए भर्ती हैं सरहदी इलाको के साथ यह आंच बाड़मेर के ग्रामीण अंचलो निम्बला भाडखा विशाला भादरेश तक पहुँच गयी।विश्वसत सूत्रो से जानकारी मिली की नए आवंटित शराब के ठेको में आबकारी विभाग द्वारा अभी तक शराब का आवंटन नही किया गया ऐसे में शराब माफिया सक्रीय हो गए।ठेको में पुराने स्टॉक की आड़ में शराब विक्रेताओ ने शराब माफियो से सांठ गाँठ कर अवेध शराब का स्टॉक तीन रोज पूर्व खरीद लिया।लगभग सभी नए ठेको में अवेध शराब बेचा जा रहा था ऐसे में आबकारी विभाग पर ऊँगली उठाना स्वाभाविक हैं।की बिना आवंटन के ठेको पर शराब बिक रही थी तब आबकारी विभाग क्या कर रहा था ।हादसे पर हादसे होते गए।जिला प्रशासन के निष्क्रिय अधिकारियो ने मामले को गंम्भीरत से नही लिया ।पुलिस अधीक्षक परिस देशमुख ने पहला मामला सामने आते ही गडरा पहुँच गए।पुरे ओराक्रां को खुद देख अपील भी जारी की।उन्हें आभास हो गया था की ठेको पे अवेध शराब की बिक्री हो रही हैं ।तीन रोज पूर्व परो गांव के शराब माफिया ने अधिकतम अवेध शराब सप्लायर की।यह शराब के कुछ ठेकेदारो ने स्वीकर किया।पुलिस विभाग तत्परता से जुटा हैं तो जिला प्रशासन और आबकारी विभाग इस मामले से नज़ारे चुरा रहे हैं। आखिर इस दुखान्तिका का जिम्मेदार कौन हैं।सबसे बड़ा जिम्मेदार आबकारी विभाग हे।जो अवेध शराब ठेको पे बिकते देखते रहे। मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश गृह मंत्रालय से कभी भी आ सकते हैं। बाड़मेर के जन प्रतिनिधि एकाएक गायब हो गए।विधायक मेवाराम जैन ने पीड़ित परिवारो के बीच पहुँच मानवीय गुण का परिचय दिया।सत्ताधारी पार्टी के जन प्रतिनिधि पुरे मामले में चुपी साढ़े हैं ।बाड़मेर के शराब माफिया रातो रात भूमिगत हो गए।

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