दुर्गसिंह राजपुरोहित बाड़मेर। बाड़मेर के बीसीएमओ कार्यालय में हार्ड ड्यूटी एलाउंस में 30 प्रतिशत कमीशन चिकित्सको से मांगने के मामले में सुर्ख़...
दुर्गसिंह राजपुरोहित
बाड़मेर। बाड़मेर के बीसीएमओ कार्यालय में हार्ड ड्यूटी एलाउंस में 30 प्रतिशत कमीशन चिकित्सको से मांगने के मामले में सुर्ख़ियो में आये बाबू देवेन्द्र चौधरी का मामला विधानसभा में ऐसे गूंजा कि हंगामा बरपा गया। बाड़मेर विधायक मेवाराम जैन के सवालो के जवाब देते हुए सरकार की जुबां भी थरथरा गई और अंत में चिकित्सा एवम् स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्र राठौड़ को सदन में ही बाबू को सस्पेंड करने की बात कहनी पड़ी। दरअसलए बाड़मेर विधानसभा क्षेत्र के चार चिकित्सक बायतू विधानसभा क्षेत्र में भेजे जाने और भ्रष्टाचारी बाबू को बचाने के कारण बाड़मेर विधायक खफा थे।
एक दिन पहले सामूहिक इस्तीफे की पेशकश
जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में दुर्गम भत्ते को लेकर नाराज तीस चिकित्सकों ने गुरुवार को जिला कलक्टर के समक्ष उपस्थित होकर सामूहिक इस्तीफे की चेतावनी दी। उनका आरोप है की भत्ते के वितरण को लेकर भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने पर उल्टे उन पर कार्रवाई की जा रही है। इस संबंध में चिकित्सकों ने जिला कलक्टर को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले से अवगत कराया। बाड़मेर ब्लॉक सीएमओ कार्यालय और चिकित्सकों के बीच चल रही तनातनी गुरुवार को चिकित्सकों के इस्तीफे की नौबत तक पहुंच गई। बीसीएमओ और लिपिक के एपीओ होने के बाद चार चिकित्सकों को इसी मामले में हटाकर अन्यत्र लगा दिया गया। इस पर चिकित्सक संगठित हो गए। चिकित्सकों ने इस कार्रवाई को गलत बताते हुए कहा कि उनको हटाना तर्कसंगत नहीं है। जहां उनको लगाया गया हैए वह भी रिक्त स्थान नहीं है। द्वेषपूर्ण कार्रवाई की गई है। जिला कलक्टर से मिलकर चिकित्सकों ने कहा कि इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो सामूहिक अवकाश पर चले जाएंगे और इस्तीफे भेज देंगे।
यह था मामला
ब्लॉक मुख्य चिकित्सा अधिकारी बाड़मेर के अधीनस्थ करीब 18 चिकित्सकों ने 16 मार्च को दुर्गम भत्ते के वितरण में देरी व लिपिक के व्यवहार को लेकर जिला कलक्टर से शिकायत कर हंगामा किया था। इसको लेकर जिला कलक्टर की ओर से जांच करवाई गई। जांच प्रभावित नहीं होए इसलिए लिपिक को 21 मार्च को एपीओ कर दिया गया था। इसके बाद 29 मार्च को ब्लॉक मुख्य चिकित्सा अधिकारी को भी एपीओ कर जयपुर मुख्यालय कर दिया गया।
नियम विरुद्ध तबादले
ब्लॉक के राणीगांवए नांदए मीठड़ा व भादरेश पीएचसी पर कार्यरत चिकित्सकों के अनुपस्थित रहने के मामले में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य निदेशालय ने इनके तबादले करने के आदेश दिए थे। ब्लॉक मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉण् महेश गौतम ने बुधवार को इन चार चिकित्सकों के तबादले कर डालेए जबकि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी की ओर से उनके भी बुधवार को तुरन्त प्रभाव से अपने पद से कार्यमुक्त होने के आदेश मिले थेए लेकिन वे गुरुवार को कार्यमुक्त हुए।
चिकित्सक व लिपिक एक ही दिन कार्यमुक्त
दुर्गम भते को लेकर चिकित्सक व लिपिक की कथित सांठ.गांठ एक बार फिर सामने आई है। जिला कलक्टर की ओर से लिपिक देवेन्द्र जाखड़ को 21 मार्च को एपीओ कर मुख्यालय निदेशालय जयपुर कर दिया। इतने दिन तक गायब रहने के बाद लिपिक व बीसीएमओ को आदेश मिलने के एक दिन बाद यानि 31 मार्च को कार्यमुक्त हुए हैं। चिकित्सकों का आरोप है कि यह इसलिए किया गया कि वित्तीय वर्ष पूरा होने के साथ ही शिकायत करने वाले चिकित्सकों की दुर्गम भत्ता राशि लैप्स हो जाए।
नियमानुसार गलत है
निदेशालय के निर्देशानुसार बीसीएमओ को एपीओ व चार चिकित्सकों के तबादले के आदेश बुधवार को कर दिए थे। बीसीएमओ ने चिकित्सकों के तबादले बुधवार को कर स्वयं गुरुवार को कार्यमुक्त हुए जो नियमानुसार गलत है।
डॉ सुनिल कुमारसिंह बिष्ट, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी
कोई टिप्पणी नहीं