रिपोर्टर : प्रकाश राठौड़ जालोर/मालवाडा:- नगर में होली के दिन होली चैक पर शाम के समय शुभ मुहर्त पर होली का दहन किया गया। इस पर्व को मनाने ...
रिपोर्टर : प्रकाश राठौड़
जालोर/मालवाडा:- नगर में होली के दिन होली चैक पर शाम के समय शुभ मुहर्त पर होली का दहन किया गया। इस पर्व को मनाने के बारे में पुराणो में मान्यता है कि इस दिन राजा हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र पेहलाद जो भगवान विष्णु का भक्त था। और उस जमाने में राजा हिरणकश्यप ही अपने आप को भगवान मान रहा था। परन्तु उसका पुत्र पेहलाद उसे भगवान नही मान रहा था। हिरण्यकश्यप के बार बार कहने पर भी वो भगवान विष्णु को ही भगवान मान रहा था। तब हिरण्यकश्यप ने अपनी बहिन होलिका जिसे ब्रहृमाजी का वरदान था कि अग्नि उसका कुछ नही बिगाड सकती थी। तब पेहलाद को मारने के लिए उसकी बहिन होलिका को उतेजित करके पेहलाद को अपनी गोद में बैठा कर उसके चारो ओर अग्नि लगा दी तब भगवान का भक्त पेहलाद बच गया ओर होलिका जल कर भष्म हो गई।
इस दिन से ही सभी लोग होलिका का पर्व मनाते है और दुसरे दिन लोग रंगबिरगे रंगो को एक दुसरे पर डालकर खुश होते है। मालवाडा नगर व आस पास के गांवो में भी हर्सोल्लास के साथ होली का पर्व शान्तिपुर्वक मनाया गया व दुसरे घुलेडी में भी लोगो ने शान्तिपुर्वक गैर खैल कर एक दुसरे पर होली के रंगो को उडाकर मनाया गया।
मालवाडा नगर में घुलेडी के दिन सवैरे सवैर छोटे छोटे बच्चे को गौरीयो द्वारा घुंडाला गया और महिलाओ ने होली के गीत भी मारवाडी में गाये जैसें- एक बार जीजा आवेतो थारी सालीया जोवे वाट..................., पालीसु लखारो आयो..................,हारे हीडो हालो रे में थे थारे सालीलागु रे..................हमके पीवर मेलोनी मने थै................, होली चौक पर गैर भी शान्तिपुर्वक खेली गई। होली के दिन व दुसरे दिन घुंलेडी पर गांव व आस पास के गावो में शांति पुर्वक होली का पर्व मनाया गया।
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