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मालवाड़ा। शीतला सातम आज

रिपोर्टर : प्रकाश राठौड़ जालोर/मालवाडा:- रादण छट के दिन महिलाओ अपने अपने घरो में कई प्रकार की खाने की वस्तुए बनाई गई व आज सितला सातम के दिन ...

रिपोर्टर : प्रकाश राठौड़
जालोर/मालवाडा:- रादण छट के दिन महिलाओ अपने अपने घरो में कई प्रकार की खाने की वस्तुए बनाई गई व आज सितला सातम के दिन अपने घरो में चुल्हे नही जलाती है। इस दिन ठंडा खाना ही सब लोग खाते है। सातम को शीतला माता को भोग लगाती है तो कई महिलाए उपवास भी और शीतला माता की कथा भी कई लोग सुनाते है। नगर में भी जीनगरो के मोहल्लो में शीतला माता का मंदिर है और बिलड गांव में जहां पर शीतला सातम के दिन नगर व आस पास के गावो से लोग मंदिर में दर्शन के लिए आतेे है और अपनी अपनी माता के दरबार में मन्नतें मांगते है।

शीतला सातम मनाने का कारण-
प्राचीन काल में जब लोगो को चेचक का प्रकोप हुआ था तब इस महामारी का कोई कारगर उपचार उपलब्ध नही था ऐसे में लोगो को प्रकृति एवं देवी देवताओ की शरण में जाने के अलावा कोई रास्ता नजर नही आ रहा था ऐसे में शितला माता की आराधना जोर पकडती गई ऐसी मान्यता है कि शीतला माता के वाहन गर्दभ के शरीर से एक उष्मा प्रवाहित होती है। जिससे महामारी से बचा जा सकता है। इसी उदेश्य को लेकर लोग शीतला माता का बडे ही धुमधाम से पुजा अर्चना कर मंदिर में मन्नते मानते। 

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