रिपोर्टर : जेताराम परिहार जालोर/जीवाणा। उपखंड सहित ग्रामीण क्षेत्र में रविवार शाम को हुई बेमौसम की बारिश व ओलावृष्टि ने उम्मीदों को धूमिल क...
रिपोर्टर : जेताराम परिहार
जालोर/जीवाणा। उपखंड सहित ग्रामीण क्षेत्र में रविवार शाम को हुई बेमौसम की बारिश व ओलावृष्टि ने उम्मीदों को धूमिल कर दिया है।सायला उपखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में बारिश किसानों पर कहर बनकर बरसी तथा कई जगह तेज बारिश व ओलावृष्टि ने किसानों की रबी की फसल को तबाह कर दिया, जिससे किसानों की चिंताएं बढ़ गई है। उधर ग्रामीण क्षेत्र में तूफानी बारिश के साथ गिरे ओलों ने खड़ी व काट कर रखी फसलों पर जम कर कहर बरपाया। किसानों की महीनों की मेहनत चन्द मिनटों में ही जमीन में दफन हो गई। ऐसे में क्षेत्र के किसानों में हताशा का माहौल है। बागोडा क्षेत्र में भी हालात जुदा नहीं है। सायला क्षेत्र के जीवाणा पोषाणा तालियाना, मेघलवा बावतरा, खेतलावस् आदि गांवों में जोरदार बारिस व ओलावृष्टि से किसानों को बर्बादी के कगार पर पहुंचा दिया है। गौरतलब है कि यहां राजस्थान के मौसम विभाग ने दो दिन में और भी बारिस होने की चेतावनी दी है रविवार शाम को क्षेत्र में बारिश व ओलावृष्टि होने से किसानों की जीरे व ईसबगोल की 80 से 90 प्रतिशत फसलें खराब हो गई है। जबकि रायड़े व गेहूं की फसल को भी खासा नुकसान हुआ था। बारिश व ओलावृष्टि ने किसानों की रही सही फसलों को भी बर्बाद कर दिया। जिससे किसानों को कहीं का नहीं छोड़ा है। बीती रात क्षेत्र की ओलावर्ष्टि से क्षेत्र के कई गांवों में भी बारिश व ओलावृष्टि ने अपना कहर बरपाया। जिससे किसानों के मुंह तक आया निवाला छिन गया।
गौरतलब है की सायला उपखंड क्षेत्र क ग्रामीण क्षेत्रो के क्रषि बेरो पर हजारो बीघा क्षेत्र में जीरे, ईसबगुल सरसों व गेहूं की फसलें थी। इसी तरह आलवाडा ग्राम क्षेत्र के गांव के करीब 300 सो सइ अधिल बेरो पर सेकड़ो बीघा से अधिक क्षेत्रफल, तालियाना ग्राम पंचायत के तालियाना व आकवा में करीब 350 बेरो पर 100 बीघा जीवाणा गांव में 400 बेरो पर करीब तीन सो बीघा क्षेत्रफल में व भुण्डवा गांव में 500 बेरो पर 1000 बीघा से अधिक क्षेत्रफल जीरे, गेहूं, रायड़े, ईसब की फसल थी। रविवार शाम तूफान के साथ हुई बारिश व ओलावृष्टि से खेतों में ओलों की सफेद चादर बिछ गई तथा जीरे व ईसब की फसलों को पूरी तरह से नष्ट कर दिया। इसके अलावा लगभग पक चुके रायड़े व सरसों की फसलों तथा गेहूं की फसलों को भी खासा नुकसान हुआ है। गत छह माह से फसलों की रखवाली कर सभी तरह के रोग व कीड़ों से बचाने के बाद कटाई से कुछ दिन पूर्व हुई बारिश व ओलावृष्टि ने सब कुछ तबाह कर दिया। जिससे क्षेत्र के किसान सदमे में आ गए है। सरकारी उम्मीद के सहारे किसान एक तरफ बारिश व ओलावृष्टि से किसानों की खड़ी फसलें नष्ट हो जाने से किसानों को नुकसान हुआ है। जिन किसानों को लाखों रुपए की उपज होने की उम्मीद थी, उन्हें अब नाममात्र की उपज से ही संतोष करना पड़ेगा। ऐसे में कई किसानों के तो बुवाई के दौरान खर्च हुए डीजल की राशि भी वापिस प्राप्त होने की उम्मीद नहीं है तथा उनकी माली हालत बुरी तरह से बिगड़ चुकी है। उपखंड सहित समूचे क्षेत्र में बड़े आकार के ओले पड़े। बेरो पर काटी हुई व खड़ी फसलें पूरी तरह से चौपट हो गई। किसानों ने बताया कि गत वर्ष भी फसलें अतिवृष्टि का षिकार हुई थी। इस बार भी फसलों को खासा नुकसान हुआ है। क्षेत्र में रविवार शाम पांच बजे बरसात एवं ओलावृष्टि से खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचा है। ग्रामीण इलाकों में हुई तेज बारिश व ओलावृष्टि की वजह से जीरा, ईसबगुल एवं गेहूं की फसलें खराब हो गई। सोमवार सुबह उपखंड क्षेत्र में आसमान पूरी तरह साफ रहा। हवाओं का दौर चलता रहा। दोपहर बाद से ही आसमान में बादलों की आवाजाही का दोर शुरू हो गया। बादलों की आवाजाही के साथ ही तेज धूल भरी हवाओं का दौर भी शुरू हो गया। बादलों की आवाजाही के चलते दिन में धूप छांव का दौर जारी रहा। बादलों की आवाजाही के चलते ग्रामीण एवं किसान अपनी फसलों को लेकर काफी चिंतित एवं परेषान नजर आ। जीवाणा क्षेत्र में रविवार दोपहर के बाद व रात्रि करीब दस बजे हुई ओलावृष्टि से खेतों में खड़ी फसलों को काफी नुकसान हुआ है। क्षेत्र के किसानो ने बताया कि रविवार को हुई बेमौसम की बारिश व ओलावृष्टि से किसानो के अरमानो पर पानी फेर दिया है।
इनका कहना :
बैमोसम बारिस ने किसानो की पक्की फसल को नुकशान पहुचाकर किसानो की कमर तोड़ दी है। सरकार तुरंत सर्वे करके किसानो को मुआवजा देना चाहिए। (चमना राम चौधरी आलवाडा)
बेमौसम बारिस व ओलाव्र्ष्टि ने किसानो की फसल को 90 % तक खराब कर दिया है ! ऐसे में किसानो की माली हालत हो गयी है। (रामाराम चौधरी आलवाडा भाजपा महामंत्री)
एक और सरकार किसानो के बिजली बिल बढाकर बोझ डाल रही है वही उधर भगवान ने भी धरतीपुत्रो पर कहर बरपाकर किसानो को बर्बाद कर दिया है।(छेलसिंह मेडतिया उप सरपंच जीवाणा)
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